Tag Archives: poem on chetak horse

चेतक की वीरता Chetak Ki Veerta – Chetak Poem

चेतक की वीरता -श्यामनारायण पाण्डेय रण बीच चौकड़ी भर-भर कर चेतक बन गया निराला था राणाप्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा का पाला था जो तनिक हवा से बाग हिली लेकर सवार उड़ जाता था राणा की पुतली फिरी नहीं तब तक चेतक मुड़ जाता था गिरता न कभी चेतक तन पर राणाप्रताप का… Read More »