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ये सोच कर मौन बस बढ़ता चला जाता हूँ – Ye Soch Kar Maun Poem Hindi

हर सुबह एक अलग नये सपने सजाता हूँ शाम तलक उन्हें मैं खुद ही भूल जाता हूँ ख्वाहिशें हज़ार ले कर रोज़ कमाने जाता हूँ बेच के ईमान खाली जेबें नही भर पाता हूँ है मेरा भी कोई अपना ये सब को बताता हूँ पर हूँ सच में अकेला ये सबसे छुपाता हूँ मिलेगा मौका… Read More »