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अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है – राहत इन्दोरी शायरि

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है – अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी… Read More »