Tag Archives: कुमार विश्वास

कुमार विश्वास कविता एक पगली लड़की के बिन

अमावस की काली रातों में – एक पगली लड़की के बिन   मावस की काली रातों में दिल का दरवाजा खुलता है, जब दर्द की काली रातों में गम आंसू के संग घुलता है, जब पिछवाड़े के कमरे में हम निपट अकेले होते हैं, जब घड़ियाँ टिक-टिक चलती हैं,सब सोते हैं, हम रोते हैं, जब… Read More »

होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो – डॉ. कुमार विश्वास

होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो दौलत ना अता करना मौला, शोहरत ना अता करना मौला बस इतना अता करना चाहे जन्नत ना अता करना मौला शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो बस एक सदा… Read More »

कुमार विश्वास मुक्तक | Kumar Vishwas Muktak

मुक्तक कुमार विश्वास | Kumar Vishwas Muktak   basti basti ghor udasi parvat parvat khalipan man heera be mol bik gaya ghis ghis rita tan chandan is dharti se us ambar tak buss do hi chiz gazab ki hai ek to tera bhola pan hai ek mera deewana pan बस्ती बस्ती घोर उदासी पर्वत पर्वत खालीपन… Read More »

देवदास मत होना खुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना – कुमार विश्वास

देवदास मत होना – कुमार विश्वास खुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इनमें उदास मत होना जो भी तुम चाहो, फ़क़त चाहने से मिल जाए ख़ास तो होना, पर इतने भी ख़ास मत होना… Read More »

तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है – तुम्हें जीने में आसानी बहुत है कुमार विश्वास

तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है तुम्हें जीने में आसानी बहुत है तुम्हारे ख़ून में पानी बहुत है ज़हर-सूली ने गाली-गोलियों ने हमारी जात पहचानी बहुत है कबूतर इश्क का उतरे तो कैसे तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुदकुशी का तो खुद की आखँ… Read More »