परशानियों पे लिखे मुक़द्दर नहीं मिले | peshaniyo pe likhe muqaddar nahi mile Shayari – Hindi Poetry

here in this shayari we are providing you the famous shayari of rahat indori pareshaniyo pe likhe muqaddar nahi mile. it is a great shayari by rahat indori. follow this post for full article. परशानियों पे लिखे मुक़द्दर नहीं मिले परशानियों पे लिखे मुक़द्दर नहीं मिले दस्तार कहाँ मिलेंगे जहाँ सर नहीं मिले| आवारगी को… Read More »

भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा (कविता)

भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा (कविता) भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा अभी तक डूबकर सुनते थे सब किस्सा मुहब्बत का मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा कभी कोई जो खुलकर हंस लिया दो पल तो हंगामा कोई… Read More »

कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है (कविता) – कुमार विशवास

कोई दीवाना कहता है (कविता) कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है ! मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !! मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है ! ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !! मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है… Read More »

झांसी की रानी | Jhansi Ki Rani Poem | Subhadra Kumari Chauhan

झांसी की रानी -सुभद्रा कुमारी चौहान सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी। चमक उठी सन् सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह… Read More »

Maa Poetry Collection | Best Maa Poems in Hindi Collection

माँ कविता – top maa poems hindi हँसते हुए माँ बाप की गाली नहीं खाते बच्चे हैं तो क्यों शौक़ से मिट्टी नहीं खाते हो चाहे जिस इलाक़े की ज़बाँ बच्चे समझते हैं सगी है या कि सौतेली है माँ बच्चे समझते हैं हवा दुखों की जब आई कभी ख़िज़ाँ की तरह मुझे छुपा लिया मिट्टी… Read More »