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कुमार विश्वास मुक्तक | Kumar Vishwas Muktak

मुक्तक कुमार विश्वास | Kumar Vishwas Muktak

मुक्तक कुमार विश्वास

समन्दर पीर का अन्दर है लेकिन रो नहीं सकता

 

basti basti ghor udasi parvat parvat khalipan

man heera be mol bik gaya ghis ghis rita tan chandan

is dharti se us ambar tak buss do hi chiz gazab ki hai

ek to tera bhola pan hai ek mera deewana pan

बस्ती बस्ती घोर उदासी पर्वत पर्वत खालीपन
मन हीरा बेमोल बिक गया घिस घिस रीता तन चंदन
इस धरती से उस अम्बर तक दो ही चीज़ गज़ब की है
एक तो तेरा भोलापन है एक मेरा दीवानापन||1||


jiski dhun par duniya naache dil aisa ek tara hai

jo humko bhi pyara hai or jo tumko bhi pyara hai

jhoom rahi hai sari duniya jab ki humare geeto par

tab kehti ho pyar hua hai, kya ehsaan tumhara hai

जिसकी धुन पर दुनिया नाचे, दिल एक ऐसा इकतारा है,
जो हमको भी प्यारा है और, जो तुमको भी प्यारा है.
झूम रही है सारी दुनिया, जबकि हमारे गीतों पर,
तब कहती हो प्यार हुआ है, क्या अहसान तुम्हारा है||2||


jo dharti se ambar jode uska naam mohbaat hai

jo shishe se patthar tode uska naam mohbaat hai

katra katra sagar tak to jaati hai umar magar

behta dariya wapas mode uska naam mohbaat

जो धरती से अम्बर जोड़े, उसका नाम मोहब्बत है ,
जो शीशे से पत्थर तोड़े, उसका नाम मोहब्बत है ,
कतरा कतरा सागर तक तो,जाती है हर उमर मगर ,
बहता दरिया वापस मोड़े, उसका नाम मोहब्बत है||3||


bahut toota bahut bikhra thapede seh nahi paya

hawao ke isharo pe magar me beh nahi paya

adhura ansuna hi reh gaya yu pyar ka kissa

kabhi tum sun nahi payi kabhi me keh nahi paya

बहुत टूटा बहुत बिखरा थपेड़े सह नहीं पाया
हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह नहीं पाया
रहा है अनसुना और अनकहा ही प्यार का किस्सा
कभी तुम सुन नहीं पायी कभी मैं कह नहीं पाया||4||


tumhare paas hu lekin jo doori hai samajta hu

tumhare bin meri hasti adhuri hai samajta hu

tumhe me bhul jaunga ye mumkin hai nahi lekin

tumhi ko bhulna sabse jaruri hai samjta hu

तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है समझता हूँ
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है समझता हूँ
तुम्हे मैं भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नहीं लेकिन
तुम्ही को भूलना सबसे ज़रूरी है समझता हूँ||5||


panaho me jo aaya ho to us par war karna kya

jo dil hara hua ho us par fir adhikar karna kya

mohabaat ka maza to dubne ki kashmkash mein hai

ho agar malum gehrai to dariya paar karna kya

पनाहों में जो आया हो तो उस पर वार करना क्या
जो दिल हारा हुआ हो उस पर फिर अधिकार करना क्या
मुहब्बत का मज़ा तो डूबने की कश्मकश में है
हो गर मालूम गहराई तो दरिया पार करना क्या||6||


samandar peer ka andar hai lekin ro nahi sakta 

yeh aansu pyar ka moti hai isko kho nahi sakta

meri chahat ko dulhan tu bana lena magar sun le

jo mera ho nahi paya wo tera ho nahi sakta

समन्दर पीर का अन्दर है लेकिन रो नहीं सकता
ये आँसू प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता||7||


pukare aankh me chadhkar tu khoon ko khoon samajta hai

andhera kisko kehte hai yeh buss jugnu samajta hai

hume to chand taron mein bhi tera roop dikhta hai

mohbaat me numaish ko addaye tu samajta hai

पुकारे आँख में चढ़कर तो खू को खू समझता है,
अँधेरा किसको को कहते हैं ये बस जुगनू समझता है,
हमें तो चाँद तारों में भी तेरा रूप दिखता है,
मोहब्बत में नुमाइश को अदाएं तू समझता है||8||


gireba chak karna kya hai, seena or mushkil hai

har ek pal muskrakar ashk peena or mushkil hai

humari badnasibi ne hume itna sikhaya hai,

kisi ke ishq mein marne se jeena or mushkil hai

गिरेबां चाक करना क्या है, सीना और मुश्किल है,
हर एक पल मुस्काराकर अश्क पीना और मुश्किल है
हमारी बदनसीबी ने हमें इतना सिखाया है,
किसी के इश्क में मरने से जीना और मुश्किल है||9||


mera apna tajurba hai tumhe batla raha hu main

koi lub chu gaya tha tab abhi tak gaa raha hu main

firake yaar me kese jiya jaye bina tadpe

jo main khud hi nahi samja wahi samja raha hu main

मेरा अपना तजुर्बा है तुम्हें बतला रहा हूँ मैं
कोई लब छू गया था तब अभी तक गा रहा हूँ मैं
फिराके यार में कैसे जिया जाये बिना तड़पे
जो मैं खुद ही नहीं समझा वही समझा रहा हूँ मैं||10||


koi patthar ki murat hai kisi patthar mein murat hai

lo humne dekh li duniya jo itni khoobsurat hai

zamana apni samjhe par mujhe apni khabar yeh hai

mujhe teri jarurat hai tuje meri jarurat hai

किसी पत्थर में मूरत है कोई पत्थर की मूरत है
लो हमने देख ली दुनिया जो इतनी ख़ूबसूरत है
ज़माना अपनी समझे पर मुझे अपनी खबर ये है
तुम्हें मेरी जरूरत है मुझे तेरी जरूरत है||11||


special read – अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है

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